चंदौली

शहाबगंज: वन भीषमपुर में कूड़ा केंद्र पर कब्जा, सिस्टम बना तमाशबीन: स्वच्छता योजना को निगल गया स्थानीय गठजोड़, ग्राम प्रधान की मनमानी

शहाबगंज ब्लॉक का वन भीषमपुर गांव आज सरकारी योजनाओं की असलियत बयान कर रहा है, जहां कागजों में स्वच्छता है, जमीन पर कब्जा और लापरवाही का साम्राज्य। गांव का कूड़ा निस्तारण केंद्र, जो स्वच्छता की रीढ़ होना चाहिए था, वर्षों से ताले में जकड़ा है और भीतर भूसा भरा जा रहा है। यह सिर्फ अनदेखी नहीं, बल्कि खुलेआम व्यवस्था की हत्या है।

कूड़ा केंद्र पर कब्जा, सिस्टम बना तमाशबीन: स्वच्छता योजना को निगल गया ‘स्थानीय गठजोड़’

चंदौली। शहाबगंज ब्लॉक का वन भीषमपुर गांव आज सरकारी योजनाओं की असलियत बयान कर रहा है, जहां कागजों में स्वच्छता है, जमीन पर कब्जा और लापरवाही का साम्राज्य। गांव का कूड़ा निस्तारण केंद्र, जो स्वच्छता की रीढ़ होना चाहिए था, वर्षों से ताले में जकड़ा है और भीतर भूसा भरा जा रहा है। यह सिर्फ अनदेखी नहीं, बल्कि खुलेआम व्यवस्था की हत्या है।

ग्रामीणों के मुताबिक यह सब बिना संरक्षण के संभव नहीं। आरोप साफ है ग्राम प्रधान की शह पर सार्वजनिक संपत्ति को निजी गोदाम बना दिया गया। अगर यह सच है तो यह सीधा-सीधा सत्ता का दुरुपयोग है, और अगर झूठ है तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं आखिर कौन है जो इस अवैध कब्जे को बचा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका पर है। बार-बार शिकायतों के बावजूद न कार्रवाई, न जांच, क्या अधिकारियों ने आंखें मूंद ली हैं या फिर सब सेट है जब जिम्मेदार ही चुप्पी साध लें, तो भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है, अपवाद नहीं।

यह मामला एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि उस बीमार सिस्टम की तस्वीर है जहां योजनाएं जनता के लिए नहीं, बल्कि कुछ लोगों के फायदे के लिए चलती हैं। स्वच्छता अभियान का नारा यहां मजाक बन चुका है और जिम्मेदारों की चुप्पी इस मजाक को और गहरा कर रही है।

अब वक्त है सीधी कार्रवाई का या तो कब्जा हटे, जिम्मेदारों पर एफआईआर हो और केंद्र चालू हो, या फिर मान लिया जाए कि योजनाएं सिर्फ दिखावे के लिए हैं और गांवों में कब्जा राज ही असली शासन है।

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